चरखी दादरी। किसान कपास की पहली व अंतिम चुनाई की गांठे पानी अलग अलग रखें। कपास की इन दोनों चुगाई में गुणवत्ता अच्छी नहीं होती और पूरी फसल की गुणवत्ता इससे प्रभावित होती है जिसका सीधा असर दाम पर पड़ता है। इसके अलावा कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान सुबह ओस समय भी कपास की चुगाई न करें और बीमारियों के प्रति सतर्क रहें। इस बार किसानों की कपास की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। कपास की फसल प्रदेश के तकरीबन सभी भागों में होती है। इस बार कपास की फसल का रोगों से बचाव बना रहा। मानसून की बारिश कम होने का भी कपास की खेती में फायदा हुआ है। ज्यादा पहली और अंतिम चुगाई की गांठों को रखें अलग, रोगों से बचाव के लिए निरंतर करते रहें निरीक्षण जड़ गलत रोग 24 घंटे में पौधा कर देता है नष्ट कपास में लगने वाले प्रमुख रोगों में कोणधार रोग, गरिय रोग और एथेगनोज रोग है। इनमें टीडा पर फकूदी बन जाती और पीले रंग के होने लगते हैं। पैराटि रोग में पीच के पत्ते मुरझा जाते हैं जबकि पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इससे प्रकार कपास में टोंडा गलन रोग का इस मौसम में अंदेशा बना रहता है और इस रोग के लिए कॉपर ऑक्साइड ग्राम व एक...
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