ब्लैकबोर्ड बेटी से गैंगरेप, 700 दिनों से घर में कैद परिवार: भाई को नौकरी नहीं देते, इंटरव्यू में पहचान जाहिर होते ही मना कर देते हैं
ब्लैकबोर्ड बेटी से गैंगरेप, 700 दिनों से घर में कैद परिवार: भाई को नौकरी नहीं देते, इंटरव्यू में पहचान जाहिर होते ही मना कर देते हैं ९९ तीज-त्योहार आए चले गए। न कोई बधाई आई, न आंसू पोंछने वाले हाथ। आज भी उसकी | अस्थियां इंतजार में हैं। हाथरस गैंगरेप मृतका के भाई. बहन के गैंगरेप को दो साल बीते। तब से हम घर पर हैं- होम अरेस्ट ! जवान हैं, लेकिन नौकरी पर नहीं जा सकते। बेटियों को स्कूल नहीं भेज सकते। तीज-त्योहार आए चले गए। न कोई बधाई आई, न आंसू पोंछने वाले हाथ। बहन की अस्थियां इंतजार में हैं। हमारी जिंदगियां इंतजार में हैं। इंसाफ मिले, तो वक्त आगे बढ़े। ये वो घर है, जहां वक्त दो साल पहले के सितंबर में अटका हुआ है। चेहरे पर मास्क लगाए युवक कई बातें कहता है। कुछ कैमरे पर, कुछ पीछे। जब हम बात कर रहे हैं, CRPF के हथियारबंद जवान साथ खड़े नवंबर 2020 में गेरू और गोबर से लिपा ये अधकच्चा मकान एकदम से छावनी में बदल गया। लोगों को सुरक्षा की जरूरत थी। क्यों! क्योंकि यहीं पर दलित समुदाय की वो युवती रहती थी, कथित गैंग रेप के बाद जिसकी मौत हो गई। बात यहीं नहीं रुकी। रातो...