जैसा खाओगे अन्न, वैसा बनेगा मन
सदियों से कई मनुष्य आत्माओं में यह एक गलत मान्यता है कि यदि हमारे भोजन में मांसाहार का समावेश नहीं होगा तो शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम हो जाएगी। इसके फलस्वरूप हम कमजोर बन जाएंगे। ऐसे कई जानवर होते हैं, जो शाकाहारी होते हुए भी बड़े शक्तिशाली होते हैं। इनमें से सबसे अच्छा उदाहरण हाथी का है, जो सभी प्राणियों में शक्तिशाली प्राणी माना जाता हैं। जब हम उपरोक्त गलत मान्यताओं से बाहर आकर सत्य से अवगत होते हैं, उस घड़ी से हमारे अंदर आध्यात्मिक संवेदना जाग्रत होना शुरू हो जाती है। इससे हमारी सूक्ष्म शक्तियों में वृद्धि होती है और हमारा सूक्ष्म मन कर रहे हैं, वह हमारे तन और मन के लिए स्वास्थ्यवर्धक है या नहीं? मनुष्यों की प्रवृत्ति स्वाभाविक रूप से अहिंसक है। मनुष्य स्वार्थ के लिए जब अन्य प्राणियों की हत्या करता है, उस समय उनका चिल्लाना, तड़पना और दुख आदि नकारात्मक भावनाओं के प्रकंपन खाद-भोज पदार्थ में प्रवाहित होते हैं। ऐसे पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए, जो किसी प्राणी के प्राण हरके पकाया गया हो।
राजयोगी ब्रह्माकुमार यह निर्णय करने में सक्षम हो जाता है कि जो अन्न हम ग्रहण निकुंज जी

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