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सावधान, सावधान Nude Video Call कर ऐसे बनाती थी अपना शिकार...

 


 फेसबुक व्हाट्सएप की एसी वीडियो कॉल से जरूर बचें..

सावधान...

Nude Video Call : न्यूड वीडियो कॉल कर अपने जाल में फंसाने वाली तीन युवतियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गाजियाबाद पुलिस तीन युवतियों को गिरफ्तार किया है. ये युवतियां लोगों को न्यूड वीडियो कॉल कर पहले अपने जाल में फंसती थीं, फिर उन्हे ब्लैकमेल करती थीं.

थाना विजयनगर पुलिस ने न्यूड वीडियो काल कर ब्लैकमैल कर पैसे हडपने व साइबर अपराध करने वाली इन 3 शातिर युवतियों को गिरफ्तार किया है. इस गैंग में शामिल एक महिला और एक व्यक्ति जो इस गैंग का सरगना बताया जा रहा है, वो फरार है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है. पुलिस को इन युवतियों के पास से 3 मोबाइल फोन, 3 वैव कैमरा, 2 आधार कार्ड, 2 चैक बुक, 2 पैन कार्ड, 2 लैपटॉप व 1 राउटर के बरामद



गिरफ्तार हुई युवतियों ने बताया की स्ट्रिप चैट नामक एक वेबसाइट के माध्यम से यह लोगों से बात करके उनके नंबर शेयर करते थे. फिर उन्हें न्यूड वीडियो कॉल करती थीं और स्क्रीन रिकॉर्ड करके बाद में उन्हें ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूल की जाती थी. पुलिस द्वारा पकड़ी गई इन युवतियों में से 2 की उम्र महज 19-19 साल है और एक युवती 26 साल की है. यह सभी पिछले 1 साल से इस काम में लगे हुए थे.

पुलिस पुलिस को इस गैंग के सरगना आकाश और उसकी महिला साथी रेनू की तलाश है. पुलिस ने जब इस गैंग के दो अकाउंट को चेक उसमें 13 लाख से ज्यादा का ट्रांजैक्शन पाया अभी इस पूरे मामले की जांच कर रही है औ

पुलिस पुलिस को इस गैंग के सरगना आकाश और उसकी महिला साथी


 रेनू की तलाश है. पुलिस ने जब इस गैंग के दो अकाउंट को चेक किया तो उसमें 13 लाख से ज्यादा का ट्रांजैक्शन पाया गया है. फिलहाल पुलिस अभी इस पूरे मामले की जांच कर रही है और पिछला रिकॉर्ड भी चेक कर रही है. पुलिस को यह सूचना मिली थी कि थाना विजयनगर में सैलून वर्ड नाम का एक पार्लर है जहां पर कुछ अवैध गतिविधि चल रही थी जब पुलिस ने छापा मारकर इन युवतियों को गिरफ्तार किया तब इस पूरे गैंग ने का खुलासा हुआ.

खबरे और भी है उन्हें भी पढ़े...............



"बस इक झिझक है यही हाल ए दिल सुनाने में

तेरा भी जिक्र आयेगा इस फसाने में.



पहले प्यार हर किसी के लिए बहुत ही यादगार होता है. पहला प्यार कहने को तो कच्ची उम्र का होता है लेकिन सच कहें तो असली प्यार वही होता है. उस प्यार में सच्चाई होती है, निश्छल होता है और सबसे अहम वह दैहिक प्रेम ना होकर प्रेम का असली अर्थ बताता है. पहला प्यार तो हमेशा मां करती है लेकिन अगर हम बात लड़के और लड़की के बीच के प्रेम की करें तो अक्सर प्यार या तो स्कूल की किसी लड़की से होता है या फिर कॉलोनी में रहनी वाली किसी बाला से. मेरे जीवन में भी पहला प्यार विद्यालय की ही देन से आया. छठी कक्षा में नए-नए गए थे. हमेशा से ही मेरे दोस्तों का एक खास ग्रुप था. हमारे ग्रुप में ही एक लड़की थी अंजलि. क्लास में हमेशा सबसे आगे. कभी कभी उसे ईष्या होती थी (क्यूंकि सब सब्जेक्टों में उससे आगे होता था लेकिन गणित और कला में वह आगे निकल जाती थी). पर ज्यादातर जब भी उसकी तरफ देखता था, दिल में कुछ कुछ होता था. तब बहुत छोटे थे. हालांकि छठी से सातवीं कक्षा तक जाते-जाते समझ में आ गया कि कुछ तो खास है जो हमेशा निगाहें उसी लड़की को ढ़ूंढ़ती हैं. वह भी कभी-कभी मजाक करती थी लेकिन दोस्ती में तो इतना चलता ही था पर यह दिल उस छोटे से मजाक को आज भी याद कर मुस्करा देता है.




my-loveकभी उससे यह कहने की हिम्मत तो नहीं हुई कि मुझे उससे प्यार है क्यूंकि सातवीं के बाद ही उसने दूसरे विद्यालय में चली गई. और आठवीं कक्षा में हमारे प्रेम के रोग को निशा नामक दवाई मिल गई.


खैर आज भी उस पहले प्यार की दस्तक दिल और दिमाग में है. अजंलि का हंसना, उसकी बातें हर चीज दिल में है बस नहीं है तो वह. पता नहीं क्यू पहले प्यार की छाप दिल पर सभी प्यार से गहरी होती है? जवाब हो तो कोई बताए."


 संजय को क्यों हो गया था कस्तूरी से प्यार....



वह एक साधारण लड़की थी. लगता था कि वह पहली बार इस तरह का काम कर रही थी, क्योंकि उस के चेहरे पर घबराहट के भाव थे. उस के कपड़े भी साधारण थे और कई जगह से फटे हुए थे.


‘‘अरे संजय… चल यार, आज मजा करेंगे,’’ बार से बाहर निकलते समय उमेश संजय से बोला. दिनेश भी उन के साथ था.


संजय ने कहा, ‘‘मैं ने पहले ही बहुत ज्यादा शराब पी ली है और अब मैं इस हालत में नहीं हूं कि कहीं जा सकूं.’’


उमेश और दिनेश ने संजय की बात नहीं सुनी और उसे पकड़ कर जबरदस्ती कार में बिठाया और एक होटल में जा पहुंचे.


वहां पहुंच कर उमेश और दिनेश ने एक कमरा ले लिया. उन दोनों ने पहले ही फोन पर इंतजाम कर लिया था, तो होटल का एक मुलाजिम उन के कमरे में एक लड़की को लाया.


उमेश ने उस मुलाजिम को पैसे दिए. वह लड़की को वहीं छोड़ कर चला गया.


वह एक साधारण लड़की थी. लगता था कि वह पहली बार इस तरह का काम कर रही थी, क्योंकि उस के चेहरे पर घबराहट के भाव थे. उस के कपड़े भी साधारण थे और कई जगह से फटे हुए थे.


संजय उस लड़की के चेहरे को एकटक देख रहा था. उसे उस में मासूमियत और घबराहट के मिलेजुले भाव नजर आ रहे थे, जबकि उमेश और दिनेश उस को केवल हवस की नजर से देखे जा रहे थे.


तभी उमेश लड़खड़ाता हुआ उठा और उस ने दिनेश व संजय को बाहर जाने के लिए कहा. वे दोनों बाहर आ गए.


अब कमरे में केवल वह लड़की और उमेश थे. उमेश ने अंदर से कमरा बंद कर लिया. संजय को यह सब बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन उमेश और दिनेश ने इतनी ज्यादा शराब पी ली थी कि उन्हें होश ही न था कि वे क्या कर रहे हैं.


काफी देर हो गई, तो संजय ने दिनेश को कमरे में जा कर देखने को कहा.


दिनेश शराब के नशे में चूर था. लड़खड़ाता हुआ कमरे के दरवाजे पर पहुंच कर उसे खटखटाने लगा. काफी देर बाद लड़की ने दरवाजा खोला.


 


उस लड़की ने दिनेश से कहा कि उस का दोस्त सो गया है, उसे उठा लो. नशे की हालत में चूर दिनेश उस लड़की की बात सुनने के बजाय पकड़ कर उसे अंदर ले गया और दरवाजा बंद कर लिया.


संजय दूर बरामदे में बैठा यह सब देख रहा था. दिनेश को भी कमरे में गए काफी देर हो गई, तो संजय ने दरवाजा खड़काया.


इस बार भी उसी लड़की ने दरवाजा खोला. वह अब परेशान दिख रही थी. उस ने संजय की तरफ देखा और कहा, ‘‘ बाबू, ये लोग कुछ कर भी नहीं कर रहे और मेरा पैसा भी नहीं दे रहे हैं.


मुझे पैसे की जरूरत है और जल्दी घर भी जाना है,’’ कहते हुए उस लड़की का गला बैठ सा गया.


संजय ने लड़की को अंदर चलने को कहा और थोड़ी देर में उसे उसी होटल के दूसरे कमरे में ले गया. उस ने जाते हुए देखा कि उमेश और दिनेश शराब में चूर बिस्तर पर पड़े थे.


संजय ने दूसरे कमरे में उस लड़की को बैठने को कहा. लड़की घबराते हुए बैठ गई. वह थोड़ा जल्दी में लग रही थी. संजय ने उसे पास रखा पानी पीने को दिया, जिसे वह एक सांस में ही पी गई.


पानी पीने के बाद वह लड़की खड़ी हुई और संजय से बोली, ‘‘बाबू, अब जो करना है जल्दी करो, मुझे पैसे ले कर जल्दी घर पहुंचना है.’’


संजय को उस की मासूम बातों पर हंसी आ रही थी. उस ने उसे पैसे दे दिए तो उस ने पैसे रख लिए और संजय को पकड़ कर बिस्तर पर ले गई और अपने कपड़े उतारने लगी.


संजय ने उस का हाथ पकड़ा और कपड़े खोलने को मना किया. लड़की बोली, ‘‘नहीं बाबू, कस्तूरी ऐसी लड़की नहीं है, जो बिना काम के किसी से भी पैसे ले ले. मैं गरीब जरूर हूं, लेकिन भीख नहीं लूंगी.’’



संजय अब बोल नहीं पा रहा था. तभी कस्तूरी ने संजय का हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर पर ले गई, यह सब इतना जल्दी में हुआ कि संजय कुछ कर नहीं पाया.


कस्तूरी ने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और संजय के भी कपड़े उतारने लगी. अब कस्तूरी संजय के इतने नजदीक थी कि उस के मासूम चेहरे को वह बड़े प्यार से देख रहा था. वह कस्तूरी की किसी बात का विरोध नहीं कर पा रहा था. उस के मासूम हावभाव व चेहरे से संजय की नजर हटती, तब तक कस्तूरी वह सब कर चुकी थी, जो पतिपत्नी करते हैं.


कस्तूरी ने जल्दी से कपड़े पहने और होटल के कमरे से बाहर निकल गई. संजय अभी भी कस्तूरी के खयालों में खोया हुआ था.


समय बीतता गया, लेकिन संजय के दिमाग से कस्तूरी निकल नहीं पा रही थी.


एक दिन संजय बाजार में सामान खरीद रहा था. उस ने देखा कि कस्तूरी भी उस के पास की ही एक दुकान से सामान खरीद रही थी.


संजय उस को देख कर खुश हुआ. उस ने कस्तूरी को आवाज दी तो कस्तूरी ने मुड़ कर देखा और फिर दुकानदार से सामान लेने में जुट गई.


संजय उस के पास पहुंचा. कस्तूरी ने संजय की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया. कस्तूरी ने सामान खरीदा और दुकान से बाहर निकल गई.


संजय उसे पीछे से आवाज देता रहा, लेकिन उस ने अनसुना कर दिया.


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कुछ दिन बाद संजय को कस्तूरी फिर दिखाई दी. उस दिन संजय ने कस्तूरी का हाथ पकड़ा और उसे भीड़ से दूर खींच कर ले गया और उस से उस की पिछली बार की हरकत के बारे में पूछना चाहा, तो संजय के पैरों की जमीन खिसक गई. उस ने देखा, कस्तूरी का चेहरा पीला पड़ चुका था और वह बहुत कमजोर हो गई थी. उस ने अपनी फटी चुनरी से अपना पेट छिपा रखा था, जो कुछ बाहर दिख रहा था.



कस्तूरी वहां से जाने के लिए संजय से जोरआजमाइश कर रही थी. संजय ने किसी तरह उसे शांत किया और भीड़ से दूर एक चाय की दुकान पर बिठाया.


संजय ने गौर से कस्तूरी के चेहरे की तरफ देखा, तो उस का दिल बैठ गया. कस्तूरी सचमुच बहुत कमजोर थी. संजय ने कस्तूरी से उस की इस हालत के बारे में पूछा, तो पहले तो कुछ नहीं बोली, लेकिन संजय ने प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरा तो वह रोने लगी.


संजय कुछ समझ नहीं पा रहा था. कस्तूरी ने अपने आंसू पोंछे और बोली, ‘‘बाबू, मेरी यह हालत उसी दिन से है, जिस दिन आप और आप के दोस्त मुझे होटल में मिले थे.’’


संजय ने उस की तरफ सवालिया नजरों से देखा, तो वह फिर बोली, ‘‘बाबू, मैं कोई धंधेवाली नहीं हूं. मैं उस गंदे नाले के पास वाली कच्ची झोंपड़पट्टी में रहती हूं. उस दिन पुलिस मेरे भाई को पकड़ कर ले गई थी, क्योंकि वह गली में चरसगांजा बेच रहा था. उसे जमानत पर छुड़ाना था और मेरे मांबाप के पास पैसा नहीं था. अब मुझे ही कुछ करना था.


‘‘मैं ने अपने पड़ोस में सब से पैसा मांगा, लेकिन किसी ने नहीं दिया. थकहार कर मैं बैठ गई तो मेरी एक मौसी बोली कि इस बेरहम जमाने में कोई मुफ्त में पैसा नहीं देता.


‘‘मौसी की यह बात मेरी समझ में आई और मैं आप और आप के दोस्तों तक पहुंच गई.’’


कस्तूरी चुप हुई, तो संजय ने अपने चेहरे के दर्द को छिपाते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारी यह हालत कैसे हुई?’’


कस्तूरी ने कहा, ‘‘बाबू, यह जान कर आप क्या करोगे? यह तो मेरी किस्मत है.’’


संजय ने फिर जोर दिया, तो कस्तूरी बोली, ‘‘बाबू, उस दिन आप के दिए गए पैसे से मैं अपने भाई को हवालात से छुड़ा लाई, तो भाई ने पूछा कि पैसे कहां से आए. मैं ने झूठ बोल दिया कि किसी से उधार लिए हैं.’’



थोड़ी देर चुप रहने के बाद वह फिर बोली, ‘‘बाबू, सब ने पैसा देखा, लेकिन मैं ने जो जिस्म बेच कर एक जान को अपने शरीर में आने दिया, तो उसे सब नाजायज कहने लगे और जिस भाई को मैं ने बचाया था, वह मुझे धंधेवाली कहने लगा और मुझे मारने लगा. वह मुझे रोज ही मारता है.’’


यह सुन कर संजय के कलेजे का खून सूख गया. इस सब के लिए वह खुद को भी कुसूरवार मानने लगा. उस की आंखों में भी आंसू छलक आए थे.


कस्तूरी ने यह देखा तो वह बोली, ‘‘बाबू, इस में आप का कोई कुसूर नहीं है. अगर मैं उस रात आप को जिस्म नहीं बेचती तो किसी और को बेचती. लेकिन बाबू, उस दिन के बाद से मैं ने अपना जिस्म किसी को नहीं बेचा,’’ यह कहते हुए वह चुप हुई और कुछ सोच कर बोली, ‘‘बाबू, उस रात आप के अच्छे बरताव को देख कर मैं ने फैसला किया था कि मैं आप की इस प्यार की निशानी को दुनिया में लाऊंगी और उसी के सहारे जिंदगी गुजार दूंगी, क्योंकि हम जैसी गरीब लड़कियों को कहां कोई प्यार करने वाला जीवनसाथी मिलता है.’’


इतना कह कर कस्तूरी का गला भर आया. वह आगे बोली, ‘‘बाबू, यह आप की निशानी है और मैं इसे दुनिया में लाऊंगी, चाहे इस के लिए मुझे मरना ही क्यों न पड़े,’’ इतना कह कर वह तेजी से उठी और अपने घर की तरफ चल दी.


यह सुन कर संजय जैसे जम गया था. वह कह कर भी कुछ नहीं कह पाया. उस ने फैसला किया कि कल वह कस्तूरी के घर जा कर उस से शादी की बात करेगा.


वह रात संजय को लंबी लग रही थी. सुबह संजय जल्दी उठा और बदहवास सा कस्तूरी के घर की तरफ चल दिया. वह उस के महल्ले के पास पहुंचा तो एक जगह बहुत भीड़ जमा थी. वह किसी अनहोनी के डर को दिल में लिए भीड़ को चीर कर पहुंचा, तो उस ने जो देखा तो जैसे उस का दिल बाहर निकलने की कोशिश कर रहा हो.



कस्तूरी जमीन पर पड़ी थी. उस की आंखें खुली थीं और चेहरे पर वही मासूम मुसकराहट थी.


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संजय ने जल्दी से पूछा कि क्या हुआ है तो किसी ने बताया कि कस्तूरी के भाई ने उसे चाकू से मार दिया है, क्योंकि सब कस्तूरी के पेट में पल रहे बच्चे की वजह से उसे बेइज्जत करते थे.


संजय पीछे हटने लगा, अब उसे लगने लगा था कि वह गिर जाएगा. तभी पुलिस का सायरन बजने लगा तो भीड़ छंटने लगी.


संजय पीछे हटते हुए कस्तूरी को देख रहा था. उस का एक हाथ अपने पेट पर था और शायद वह अपने प्यार को मरते हुए भी बचाना चाहती थी. उस के चेहरे पर मुसकराहट ऐसी थी, जैसे उन खुली आंखों से संजय को कहना चाहती हो, ‘बाबू, यह तुम्हारे प्यार की निशानी है, पर इस में तुम्हारा कोई कुसूर नहीं है.’


संजय पीछे मुड़ा और अपने घर पहुंच कर रोने लगा. वह अपनेआप को माफ नहीं कर पा रहा था, क्योंकि अगर वह कल ही उस से शादी की बात कर लेता तो शायद कस्तूरी जिंदा होती.


बारिश होने लगी थी. बादल जोर से गरज रहे थे. वे भी कस्तूरी के प्यार के लिए रो रहे थे.


🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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