सिरसा के अस्पताल में युवक की मौत: परिजनों ने लगाए डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप, पोस्टमार्टम करवाने से किया इनकार
पेट में जलन होने पर लाए अस्पताल
■ दोस्त बोले सांस चल रहे थे, इलाज नहीं किया डॉक्टर परिजनों को | बुलाने पर अड़े रहे
■ नशे करने का आदि था मृतक युवक
हरियाणा के सिरसा अस्पताल में एक युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया। सूचना पाकर शहर थाना प्रभारी और जेजे कॉलोनी पुलिस चौकी पहुंची और परिजनों को समझाने की कोशिश की।
जेजे कॉलोनी निवासी योगेश ने बताया कि हम युवक फौजी को लेकर आए थे, उसके सांस चल रहे थे। अस्पताल में भर्ती करवाया, तो डॉक्टर परिवार के लोगों को बुलाने पर अड़ गए और उसका इलाज नहीं किया। फिर उन्होंने उसके परिजनों को फोन कर अस्पताल में बुलाया। जब तक उसके परिजन अस्पताल आए,
तब तक वह दम तोड़ चुका था। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टर की गलती से युवक की मौत हुई है।
उन्होंने बताया कि मृतक युवक पहले नशा करता था। उसके पेट में जलन हुई तो हम उपचार के लिए अस्पताल ले गए। हम पुलिस कार्रवाई नहीं करवाना चाहते, लेकिन पुलिस करवाने पर अड़ी हुई है। हम बॉडी लेकर जाएंगे। पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे।
मृतक के परिवार के लोग भी मौके पर पहुंचे और पोस्टमार्टम न करवाने की जिद्द पर अड़ गए। शहर थाना प्रभारी प्रदीप कुमार ने परिजनों को समझाया कि पोस्टमार्टम जरूरी है। लेकिन परिजन मानने को तैयार नहीं हुए। परिजनों के आरोप थे कि डॉक्टर की लापरवाही से मौत हुई है। जब इलाज ही सही से नहीं हुआ तो पोस्टमार्टम क्यों करवाए। हम बिना पोस्टमार्टम के ही बॉडी लेकर जायगे|
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सच्ची प्रेम कहानी
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घर में कई दिनों से चारों ओर मौत का सन्नाटा छाया था, लेकिन आज घर में खटपट चल रही थी. मामाजी कभी ऊपर, कभी नीचे और कभी गार्डन में आ जा रहे थे. उन के पहाड़ जैसे दुख को बांटने वाला कोई सगासंबंधी पास न था. घर में सब से बड़ा होने के नाते सभी जिम्मेदारियों का बोझ उन्हीं के कंधों पर आ पड़ा था. वे तो खुल कर रो भी नहीं सकते थे. उन के भीतर की आवाज उन्हें कचोटकचोट कर कह रही थी कि अमृत, अगर तुम ही टूट गए तो बाकी घर वालों को कैसे संभालोगे? कितना विवश हो जाता है मनुष्य ऐसी स्थितियों में. उन का भानजा, उन का दोस्त विवेक इस संसार को छोड़ कर जा चुका था, लेकिन वे ऊहापोह में पड़े रहने के सिवा और कुछ कर नहीं पा रहे थे.
अपने दुख को समेटे, भावनाओं से जूझते वे बोले, ‘‘बस उन्हीं की प्रतीक्षा में 2 दिन बीत गए. मंजू, पता तो लगाओ, अभी तक वे लोग पहुंचे क्यों नहीं? कोई उत्सव में थोड़े ही आ रहे हैं. अभी थोड़ी देर में बड़ीबड़ी गाडि़यों में फ्यूनरल डायरैक्टर पहुंच जाएंगे. इंतजार थोड़े ही करेंगे वे.’’
‘‘मामाजी, अभीअभी पता चला है कि धुंध के कारण उन की फ्लाइट थोड़ी देर से उतरी. वे बस 15-20 मिनट में यहां पहुंच जाएंगे. वे रास्ते में ही हैं.’’
‘‘अंत्येष्टि तो 4 दिन पहले ही हो जानी चाहिए थी लेकिन...’’
‘‘मामाजी, फ्यूनरल वालों से तारीख और समय मुकर्रर कर के ही अंत्येष्टि होती है,’’ मंजू ने उन्हें समझाते हुए कहा.
‘‘उन से कह दो कि सीधे चर्च में ही पहुंच जाएं. घर आ कर करेंगे भी क्या? विवेक को कितना समझाया था, कितने उदाहरण दिए थे, कितना चौकन्ना किया था लोगों ने तजुर्बों से कि आ तो गए हो चमकती सोने की नगरी में लेकिन बच के रहना. बरबाद कर देती हैं गोरी चमड़ी वाली गोरियां. पहले गोरे रंग और मीठीमीठी बातों के जाल में फंसाती हैं. फिर जैसे ही शिकार की अंगूठी उंगली में पड़ी, उसे लट्टू सा घुमाती हैं. फिर किनारा कर लेती हैं.’’
बिहार में शादी की पहली ही रात दुल्हन की सच्चाई सामने आ गई। राजी-खुशी विवाह करने वाला लड़का अपनी ही पत्नी पर भड़क गया। सीधे उसे लेकर चिकित्सक के पास पहुंच गया। मामला राज्य के सारण जिले का है । सारण जिले के डेरनी की सुनीता कुमारी (बदला हुआ नाम) की शादी 26 22 को मकेर निवासी संजीत कुमार (बदला हुआ नाम) से हुई थी। शादी के बाद दूसरे दिन ही 7sep को संजीत ने सुनीता को किन्नर बताकर उसे मायके पहुंचाकर दूसरा विवाह कर लिया। इसकी भनक लगने पर सुनीता के स्वजन मकेर पहुंचे तो संजीत के स्वजनों ने बताया कि सुनीता किन्नर है। वह अपने बेटे की शादी किन्नर से नहीं कर सकते हैं। आप लोगों ने उन्हें धोखा दिया है। सुहागरात के दिन जानकारी होने पर हमलोगों ने मुजफ्फरपुर में सुनीता की जांच भी कराई है। इसके बाद हो हंगामा के बाद मामले में दोनों तरफ से पंचायती हुई। जब पंचायत से मामले का समाधान नहीं हुआ तो सुनीता ने महिला हेल्प लाइन का दरवाजा खटखटाया। महिला हेल्पलाइन की प्रबंधक मधुबाला ने इस मामले में दोनों पक्षों को नोटिस भेजकर सुनवाई के लिए तीन सितंबर को हाजिर होने को कहा था। पति हेल्प लाइन में हाजिर हुए। करके किन्नर से ...
आज रावतसर की घटना ने अंदर तक झकझोर कर रख दिया एक तरफ़ समाज के नाम पर वोट की राजनीति करने वाले नेता थे ओर दूसरी तरफ़ उसी समाज की एक बेटी की लाश जो तीन दिनो से मोर्चरि में पोस्टमार्डम के इंतजार में थी और ऊपर से तेजा दशमी के पावन पर्व जो की समाज के अग्रणी नेता 🅓🅙 पर डांस करके समाज को तेजाजी के पदचिन्हो पर चलने की सलाह देते हुए उस लाश के करीब से गुजर गये जैसे वहा कुछ हुआ ही नहीं आज एक बात समझ में आई जो भी समाज के ठेकेदार बने घूमते है वो ही समाज के सबसे बड़े दुश्मन है अगर एक बार हम मान लेते है की उस बेटी ने आत्महत्या की है पर उसकी वजह भी तो यही समाज है जिसने उसे इतना मजबूर किया की उसे मरना पड़ा और कोई रास्ता नहीं बचा आज एक बेटी की मोत ने समाज का असली चेहरा दिखा दिया आज एक सशक्त समाज की मरी हुई स्वेदना देखने को मिली जो आने वाले समय में समाज को गहरे घाव देती रहेगी 🥲🥲 बहन हम शर्मिंदा है तेरे कातिल समाज के ठेकेदार है भगवान बेटी की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देवे और परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करे 🙏🙏🙏
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