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बच्चियों में दिख रहे अर्ली प्यूबर्टी के लक्षण: मोबाइल- लैपटॉप की स्क्रीन जिम्मेदार, आखिर क्या है लड़कियों की प्यूबर्टी की सही उम्? अर्ली प्यूबर्टी से बढ़ रहा है स्ट्रेस

 


 आज अचानक प्यूबर्टी की चर्चा क्यों? वो इसलिए क्योंकि ज्यादातर देशों में छोटी बच्चियों में समय से पहले प्यूबर्टी के मामले सामने आए हैं। पहले ऐसा माना जा रहा था कि कोविड इंफेक्शन की वजह से बच्चियों में फिजिकल चेंजेज दिख रहे हैं।


 यूरोपियन सोसाइटी फॉर पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजी ने अपनी

 एक रिसर्च में इस अनुमान को गलत साबित कर दिया। जिसमें

 कहा गया है कि अर्ली प्यूबर्टी की वजह कोरोना इंफेक्शन नहीं,


 बल्कि स्मार्ट गैजेट्स का यूज है। स्मार्ट गैजेट्स का मतलब तो आप सब जानते हैं- मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या टीवी । आप सोच रहे होंगे कि ये रिसर्च तो विदेश की है फिर हम इस पर बात क्यों कर रहे हैं।





दरअसल, लॉकडाउन के दौरान भारत में भी ज्यादातर बच्चों की पढ़ाई मोबाइल, लैपटॉप या टेबलेट से ही हो रही थी। इतना ही नहीं बच्चे मैदान में खेलने जा नहीं सकते थे, तो पढ़ाई के बाद का वक्त भी वे मोबाइल में ही गुजार रहे थे। तो हमने सोचा इस रिसर्च पर अपने देश के एक्सपर्ट्स से भी बात की जाए।


हमारे एक्सपर्ट हैं- सीताराम भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च की Obstetrics और Gynecology कंसलटेंट डॉ. प्रीति अरोरा धमीजा और LONDON के MRCOG की MBBS, MD डॉ. नीरा भान । तो चलिए शुरू करते हैं...


सवाल- प्यूबर्टी का मतलब क्या है, जो छोटी बच्चियों में समय से पहले आ रहा है?


डॉ. प्रीति अरोरा धमीजा - प्यूबर्टी एक ऐसा समय होता है, जिसमें एक लड़का या लड़की के शरीर में बड़े बदलाव होते हैं। उनके शरीर में कई तरह के डेवलपमेंट और ग्रोथ नजर आने लगते हैं।


सवाल- कैसे पता चलेगा कि आपकी बच्ची में प्यूबर्टी शुरू हो गई है?


जवाब- वैसे तो मां-पापा खुद भी इस फेज से गुजर चुके होते हैं। वे अपने बच्चों के इस उम्र को लेकर अलर्ट भी रहते हैं। इसके बावजूद आपको कुछ लक्षण बताते हैं जिसे आप नीचे दिए ग्राफिक में पढ़ सकते हैं....

लड़कियों में प्यूबर्टी आने पर क्या-क्या बदलाव होते हैं?

 हाइट बढ़ने लगती है


 शरीर में उभार आने लगता है

 प्राइवेट पार्ट में प्यूबिक हेयर आने लगते हैं


 पीरियड्स शु हो जाते हैं

 स्किन ऑयली होने लगती है

 कुछ लड़कियों को पिंपल आने लगते हैं

 पिट्स में पसीना ज्यादा आने लगता है


सवाल- स्मार्ट गैजेट्स की वजह से जिन लड़कियों में अर्ली प्यूबर्टी

 हो रही है, वे खुद को इससे बचाने के लिए क्या कर सकती हैं?


 जवाब- यंगस्टर और टीन साइकेट्रिस्ट कंसलटेंट, डॉ माइट फेरिन के अनुसार,

 • सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल कम करें या बिल्कुल न करें।

 • दिनभर या लंबे समय तक गैजेट यूज करना सही नहीं है।

 • मोबाइल में फिटनेस वीडियो देखें ताकि खुद को फिट रखने की कोशिश कर सकें।

 • माता-पिता बच्चों को एक लिमिटेड टाइम के लिए ही मोबाइल का इस्तेमाल करने की इजाजत दें।

 सवाल- स्मार्ट गैजेट्स के अलावा लड़कियों में प्यूबर्टी किस वजह से होती है ?


 डॉ. नीरा भान- आपके दिमाग में हाइपोथैलेमस ग्लैंड होता है, जो कुछ केमिकल्स प्रोड्यूस करता है। इसकी वजह से आपकी बॉडी डेवलप होती है और कुछ चेंजेस आते हैं।

 प्यूबर्टी को लेकर माता-पिता के कुछ कॉमन सवाल, जो वे डॉक्टर से जानना चाहते हैं। इसे हम एक्सपर्ट के हवाले बता रहे हैं...


 पेरेंट- मेरी बेटी बहुत चिड़चिड़ी हो गई है, मैं क्या करूं? डॉ. नीरा भान- बच्ची में कुछ साल के लिए हार्मोनल चेंजेस यानी बदलाव हो रहे हैं। इसलिए पेरेंट्स को ....


 • उससे झगड़ना नहीं चाहिए ।

 • उसे चिल्लाना नहीं चाहिए ।


उन्हें समझने की कोशिश करें।


 प्यूबर्टी से रिलेटेड कुछ और सवालों के जवाब नीचे लिखे ग्राफिक में पढ़ें और दूसरों को शेयर भी करें


 लड़कियों में प्यूबर्टी आने की नॉर्मल एज कितनी है?


 8-14 साल के बीच में लड़कियों में प्यूबर्टी के लक्षण दिखने लगते हैं।

प्यूबर्टी को लेकर डॉक्टर से मिलने की जरूरत कब होती है?


 जब आपकी बच्ची में 8 साल से कम उम्र में प्यूर्टी के लक्षण दिखने लगे।

 जब 15 साल तक प्युबर्टी के लक्षण या प्युबर्टी आए ही नहीं ।

 सोर्स- डॉ. नीटा भान, MBBS, MD MRCOG, LONDON


 अब कुछ सवाल बच्चियों की लेते हैं...


 सवाल- मेरी फ्रेंड्स की बॉडी में चेंजेस होने लगे हैं, पीरियड आने लगे, लेकिन मुझे नहीं आ रहे हैं, तो क्या मैं नॉर्मल नहीं हूं? डॉ. नीरा भान- हां, आप बिल्कुल नॉर्मल हैं। परेशान होने की जरूरत नहीं है। प्यूबर्टी के लक्षण किसी को 9 साल में आ सकते हैं, तो किसी को 13 साल में। ये आम बात है। जरूरी नहीं कि आपकी फ्रेंड्स में जिस उम्र में चेंजेस आएं, तभी आपके अंदर भी आएं।


 सवाल- मेरी एक ब्रेस्ट बड़ी है और दूसरी उसके मुकाबले छोटी,

 ऐसा क्यों?


 डॉ. नीरा भान- दोनों ब्रेस्ट की ग्रोथ अलग-अलग फेज में होती है, लेकिन फाइनली दोनों एक साइज में पहुंच जाएंगी। इसलिए चिंता नहीं करें।


 सवाल- क्या पीरियड्स शुरू होने के बाद मेरी हाइट बढ़नी बंद हो जाएगी? डॉ. नीरा भान- जी नहीं। आमतौर पर लड़कियों की हाइट 14-15


साल तक तेजी से बढ़ती है। इसके बाद भी उनकी हाइट बढ़ती है, लेकिन रेट ऑफ ग्रोथ यानी जिस स्पीड में हाइट बढ़ रही थी, वो पीरियड्स के बाद थोड़ी कम हो जाती है।


 सवाल- मैं बहुत सोती हूं और मुझे भूख भी ज्यादा लगती है, क्या ये नॉर्मल है?


 डॉ. नीरा भान- आपको ये सोचना होगा कि आपकी बॉडी में इतना ग्रोथ हो रहा और सेल डिविजन हो रहा, जिसकी वजह से आपकी ज्यादा से ज्यादा एनर्जी इन चीजों में डायवर्ट हो रही है। एनर्जी जब उधर जाएगी, तो आप थके-थके रहेंगे और आपको ज्यादा भूख लगेगी।


 • भूख ज्यादा लग रही है, तब भी हेल्दी बैलेंस डाइट ही खाएं। एक्सरसाइज ज्यादा करना है, ताकि आपकी बॉडी मजबूत बनी रहे।


 सवाल- मुझे जल्दी पीरियड्स आ गए और मेरी मां ने कहा कि किसी को बताना नहीं, घर का ये सामान मत छूना, वो मत छूना। इससे मैं स्ट्रेस में रहती हूं। क्या करूं?


 जवाब- ऐसी सिचुएशन में माता-पिता को लड़कियों का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें छूआछूत की नजर से बिल्कुल नहीं देखना चाहिए। पेरेंट्स से रिक्वेस्ट हैं कि अगर उनकी बेटियों में अर्ली प्यूबर्टी हो जाती है, तो बेटी को समझाएं न कि सामाजिक दवा में उस पर और प्रेशर डालें।


 इससे उसे स्ट्रेस या सदमा लग जाता है। ऐसे में प्यार और मैच्योरिटी से पेरेंट्स डील करें। आप भी दूसरों की बातों को दिल और दिमाग से न लगाएं, खुद को पढ़ाई में बिजी रखें। यह नेचुरल प्रोसेस है। सभी लड़कियों को इससे गुजरना पड़ता है।

स्मार्ट गैजेट्स की वजह से छोटी बच्चियों में समय से पहले प्यूबर्टी आ रही है, इस बात का पता कैसे चला?

 तुर्की की गाजी यूनिवर्सिटी और अंकारा सिटी हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों ने 18 मादा चूहों पर रिसर्च की।

 • इन्हें अलग-अलग तरह की LED लाइट से कम या ज्यादा वक्त के लिए एक्सपोज किया गया।

 • जिसके बाद पता चला कि जिन चूहों ने लाइट के सामने ज्यादा समय बिताया, वे दूसरों के मुकाबले जल्दी मैच्योर हुए।

 • डिवाइस की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हॉर्मोन की मात्रा को घटा सकती है।

 • ये हॉर्मोन हमारे दिमाग में रिलीज होता है और नींद को रेगुलेट करता है। इसके साथ ही रिप्रोडक्शन में काम आने वाले हार्मोन्स की मात्रा भी बढ़ सकती है, जिससे प्यूबर्टी समय से पहले ही आ सकती है।



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