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लंपी रोग का पशुपालकों में कैसे फैलता जानिए

Dinesh soni 


लंपी रोग का पशुपालकों में डर: पशु विशेषज्ञ बोले- गर्म व नम मौसम में मक्खी, मच्छर व





चीचड़ से फैलता है वायरस रोहतक | 25/08/22


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पशु पालकों को लंपी के बारे में जागरूक करते हुए


हरियाणा के रोहतक में लंपी संक्रमण को लेकर पशुपालकों में डर बना हुआ है। वहीं सरकार व प्रशासन द्वारा पशुपालकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। ताकि लंपी संक्रमण को फैलने से रोका जा सके और पशुओं को सुरक्षित रखा जाए। हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के स्थानीय पशु विज्ञान केन्द्र व झज्जर के प्रभारी डॉ. राजेन्द्र सिंह ने कृषि विज्ञान केन्द्र में पशुपालकों को लंपी त्वचा रोग के प्रति








जागरूक किया।


इन गांवों में किया जागरूक


डॉ. राजेंद्र सिंह ने गांव चिड़ी, नान्दल, टिटौली, काहनी, महम, बलहम्बा, रोहतक के पशुपालकों को लंपी रोग व इससे बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला में अन्य प्रान्तों की सीमा ना लगने के कारण इसका प्रकोप नाममात्र देखने में आया है। उन्होंने पशुपालकों से आह्वान किया है कि वे लंपी चर्म रोग से अपने पशुधन को बचाएं।


ऐसे फैलता है लंपी रोग


यह वायरस जनित रोग मुख्यत गोवंश में पाया जाता है तथा भैंसों में यह रोग ना के बराबर है। यह वायरस गर्म व मौसम में मक्खी, मच्छर व चीचड़ आदि के काटने से फैलता है। पशुपालक पशुओं के बाड़े को साफ-सुथरा रखें व नियमित रूप से मक्खी व मच्छर रोधी दवाओं का प्रयोग करें।


10-15 दिनों में ठीक


डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि लंपी चर्म रोग से ग्रस्त पशु देखभाल व इलाज से 10-15 दिनों में पूर्ण स्वस्थ हो जाता है और दुग्ध उत्पादन भी सामान्य हो जाता है। स्वस्थ पशु का संक्रमित पशु के संपर्क में आने से भी रोग हो सकता है।











जागरूक किया।


इन गांवों में किया जागरूक


डॉ. राजेंद्र सिंह ने गांव चिड़ी, नान्दल, टिटौली, काहनी, महम, बलहम्बा, रोहतक के पशुपालकों को लंपी रोग व इससे बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला में अन्य प्रान्तों की सीमा ना लगने के कारण इसका प्रकोप नाममात्र देखने में आया है। उन्होंने पशुपालकों से आह्वान किया है कि वे लंपी चर्म रोग से अपने पशुधन को बचाएं।


ऐसे फैलता है लंपी रोग


यह वायरस जनित रोग मुख्यत गोवंश में पाया जाता है तथा भैंसों में यह रोग ना के बराबर है। यह वायरस गर्म व मौसम में मक्खी, मच्छर व चीचड़ आदि के काटने से फैलता है। पशुपालक पशुओं के बाड़े को साफ-सुथरा रखें व नियमित रूप से मक्खी व मच्छर रोधी दवाओं का प्रयोग करें।


10-15 दिनों में ठीक


डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि लंपी चर्म रोग से ग्रस्त पशु देखभाल व इलाज से 10-15 दिनों में पूर्ण स्वस्थ हो जाता है और दुग्ध उत्पादन भी सामान्य हो जाता है। स्वस्थ पशु का संक्रमित पशु के संपर्क में आने से भी रोग हो सकता है 








यह करें बचाव


• बीमार पशु के घावों को नियमित लाल दवाई व फिटकरी से साफ करें


• बीमार पशु के दुग्ध सेवन उबालकर करें


• बीमार पशु के संपर्क में आने पर हाथों को साबुन से धोएं


• संक्रमण का प्रसार कम करने के लिए पशुओं का


आवागमन बंद किया जाए।


• चंपी से पशु की मृत्यु होने पर एहतियात शवों को दो से ढाई मीटर गहरे गड्ढे में दफनाएं।


• रोग के लक्षण दिखने पर नजदीकी पशु चिकित्सक से


सम्पर्क करें।


• पशु बाड़े में फिनाइल के घोल का छिड़काव करें।-मक्खी-मच्छर को खत्म करने के लिए डेल्टामैथ्रीन का स्प्रे पशु चिकित्सक से परामर्श के बाद करें।


• खाने में (खुराक में) खासतौर पर हर वर्ग के पशु को नियमित रूप से खनिज मिश्रण खिलाएं।


बचाव के लिए गोटपोक्स दवाई का टीकाकरण करवायें।


लंपी के लक्षण


• बुखार आना


• मुंह व नाक से स्त्राव निकलना

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