स्नान-दान के लिए महापर्व रहेगा शनिवार
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या का योग 26 और 27 अगस्त को रहेगा। ये शुभ तिथि शुक्रवार को सूर्योदय के बाद शुरू होगी और शनिवार को दोपहर एक बजे के बाद तक रहेगी। इस तरह पूजा-पाठ और श्राद्ध के लिए दो दिन मिलेंगे। 27 को शनिवार होने से ये साल की आखिरी शनैश्चरी अमावस्या रहेगी। इस दिन किए गए तीर्थ स्नान और दान का कई गुना ज्यादा पुण्य फल
मिलता है।
पितृ पूजा के दो दिन
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, शुक्रवार और शनिवार दोनों दिन कुतप काल यानी दिन के आठवें मुहूर्त मेंअमावस्या तिथि रहेगी। मध्याह्न व्यापिनी होने के कारण इस मुहूर्त में पितृ पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए दोनों ही दिन पितृ पूजा के लिए बहुत खास रहेंगे। दोनों ही दिन पितृ पूजा का शुभ समय यानी कुतप काल 11.36 से 12.24 तक रहेगा।
स्नान-दान के लिए शनैश्चरी अमावस्या
शनिवार को सूर्योदय के वक्त भाद्रपद महीने की अमावस्या रहेगी। इसलिए तीर्थ स्नान और दान के लिए ये दिन ही खास रहेगा। इस संयोग में किए गए शुभ काम से मिलने वाला पुण्य फल और बढ़ जाता है। इस दिन अन्न और कपड़ों का दान करने का बहुत महत्व है। गुड़, घी, चावल, तिल, नमक, छाता और जूते-चप्पल का भी दान कर सकते हैं।
शुक्रवार को अमावस्या होना शुभ
माना जाता है कि सौम्य वार में पड़ने वाली अमावस्या शुभ होती है। वहीं क्रूर वार के साथ अशुभ फल देने वाली होती है। ज्योतिष ग्रंथों में बताया गया है कि सोम, मंगल, शुक्र और गुरुवार को अमावस्या हो तो ये देश के लिए शुभ होती है। इस योग से अन्य अशुभ ग्रहों के असर में कमी आती है। वहीं, शनिवार को पड़ने वाली इस तिथि में स्नान-दान से दोष और परेशानियां दूर हो जाती हैं।
इस पर्व पर क्या करें
शुक्रवार और शनिवार को देवताओं पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए। इससे शनि के अशुभ प्रभाव से राहत मिलती है और पितृ दोष भी कम हो जाता है। इन दोनों दिनों में शाम को शिवलिंग के पास तिल के तेल का दीपक लगाना चाहिए और शनिवार को शनिदेव की मूर्ति पर तिल का तेल चढ़ाना चाहिए। अमावस्या पर
गौशाला में प्रा
अजान या पैयों का दान करने का भी विश
शुक्रवार को अमावस्या होना शुभ
माना जाता है कि सौम्य वार में पड़ने वाली अमावस्या शुभ होती है। वहीं क्रूर वार के साथ अशुभ फल देने वाली होती है। ज्योतिष ग्रंथों में बताया गया है कि सोम, मंगल, शुक्र और गुरुवार को अमावस्या हो तो ये देश के लिए शुभ होती है। इस योग से अन्य अशुभ ग्रहों के असर में कमी आती है। वहीं, शनिवार को पड़ने वाली इस तिथि में स्नान-दान से दोष और परेशानियां दूर हो जाती हैं।
लाइक
कमेंट
सेव
शेयर

Comments
Post a Comment