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आतंकियों से 2 घंटे तक बहादुरी से लड़े


 आतंकियों से 2 घंटे तक बहादुरी से लड़े सतपाल:ताबड़तोड़ फायरिंग के बीच आगे बढ़ते गए, करीब से सिर में लगी गोली


शहीद के अंतिम दर्शन के लिए जैतपुरा में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। सभी की आंखें नम थीं। भारत माता की जय... सतपाल अमर रहे के नारों से पूरा गांव गूंज उठा।

तारीख: 11 अगस्त


स्थान: राजौरी(जम्मू-कश्मीर) के दारहाल इलाके में सेना का कैंप


भारतीय सेना के जवान अपने कैंप में सो रहे थे, तभी तेज धमाका हुआ। जब तक कुछ समझ पाते, तब तक ग्रेनेड हमले के साथ ही, ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं। फौरन जवानों ने मोर्चा संभाला। इनमें झुंझुनूं के हवलदार सतपाल सिंह भी शामिल थे।


गोलियों की परवाह किए बगैर वह आतंकियों की ओर बढ़ते गए। करीब 3 घंटे तक आमने-सामने से गोलीबारी होती रही। मौके पर ही 4 जवान शहीद हो गए और कई घायल। सतपाल आतंकियों के काफी करीब चले गए थे। इसी दौरान एक गोली उनके सिर में और दूसरी कमर में आ धंसीं। घायल होने के बाद भी वे लड़ते रहे। अपनी बहादुरी से सतपाल और अन्य सैनिकों ने दोनों आतंकियों को अंदर घुसने नहीं दिया। कुछ देर बाद दोनों आतंकियों ने जवानों को ढेर कर दिया।


सतपाल सहित अन्य घायलों को तत्काल आर्मी हॉस्पिटल भेजा गया। करीब 10 दिन इलाज के बाद वो 21 अगस्त को शहीद हो गए। उनकी पार्थिव देह मंगलवार को झुंझुनूं जिले के जैतपुरा गांव पहुंची। वो राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। जैतपुरा में उनका अंतिम संस्कार किया गया। दोपहर 1.40 बजे पर शहीद सतपाल के बेटे शांतनु ने मुखाग्नि दी। इस दौरान 11 राजपूताना राइफल्स के रिटायर्ड जवानों के साथ लोगों ने नारे लगाकर नम आंखों से विदाई दी। पति के अंतिम दर्शन कर वीरांगना बेसुध हो गई। शहीद सतपाल के बच्चे अपने ताऊ नायब सूबेदार से लिपटकर रोए।

 आतंकियों से 2 घंटे तक बहादुरी से लड़े सतपाल:ताबड़तोड़ फायरिंग के बीच आगे बढ़ते गए, करीब से सिर में लगी गोली


शहीद के अंतिम दर्शन के लिए जैतपुरा में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। सभी की आंखें नम थीं। भारत माता की जय... सतपाल अमर रहे के नारों से पूरा गांव गूंज उठा।

तारीख: 11 अगस्त


स्थान: राजौरी(जम्मू-कश्मीर) के दारहाल इलाके में सेना का कैंप


समय: तड़के करीब 3 बजे


भारतीय सेना के जवान अपने कैंप में सो रहे थे, तभी तेज धमाका हुआ। जब तक कुछ समझ पाते, तब तक ग्रेनेड हमले के साथ ही, ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं। फौरन जवानों ने मोर्चा संभाला। इनमें झुंझुनूं के हवलदार सतपाल सिंह भी शामिल थे।



गोलियों की परवाह किए बगैर वह आतंकियों की ओर बढ़ते गए। करीब 3 घंटे तक आमने-सामने से गोलीबारी होती रही। मौके पर ही 4 जवान शहीद हो गए और कई घायल। सतपाल आतंकियों के काफी करीब चले गए थे। इसी दौरान एक गोली उनके सिर में और दूसरी कमर में आ धंसीं। घायल होने के बाद भी वे लड़ते रहे। अपनी बहादुरी से सतपाल और अन्य सैनिकों ने दोनों आतंकियों को अंदर घुसने नहीं दिया। कुछ देर बाद दोनों आतंकियों ने जवानों को ढेर कर दिया।


सतपाल सहित अन्य घायलों को तत्काल आर्मी हॉस्पिटल भेजा गया। करीब 10 दिन इलाज के बाद वो 21 अगस्त को शहीद हो गए। उनकी पार्थिव देह मंगलवार को झुंझुनूं जिले के जैतपुरा गांव पहुंची। वो राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। जैतपुरा में उनका अंतिम संस्कार किया गया। दोपहर 1.40 बजे पर शहीद सतपाल के बेटे शांतनु ने मुखाग्नि दी। इस दौरान 11 राजपूताना राइफल्स के रिटायर्ड जवानों के साथ लोगों ने नारे लगाकर नम आंखों से विदाई दी। पति के अंतिम दर्शन कर वीरांगना बेसुध हो गई। शहीद सतपाल के बच्चे अपने ताऊ नायब सूबेदार से लिपटकर रोए।


शहीद सतपाल सिंह के बेटे शांतनु ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान लोग देशभक्ति के नारे लगा रहे थे।

शहीद सतपाल सिंह के बेटे शांतनु ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान लोग देशभक्ति के नारे लगा रहे थे।

अंतिम संस्कार से पहले सुबह बुहाना में शहीद सतपाल सिंह के बेटे और बेटी से लिपटकर रोते उसके ताऊ नायब सूबेदार राजेश सिंह। जिसने भी यह दृश्य देखा, वह भावुक हो गया। राजेश सिंह ने कहा कि पिता नहीं चाहते थे कि सतपाल सेना में जाए, उसे टीचर बनाना चाहते थे, सतपाल ने कहा था कि वह सेना में जाएगा और एक दिन मुझसे आगे निकलकर दिखाएगा।

अंतिम संस्कार से पहले सुबह बुहाना में शहीद सतपाल सिंह के बेटे और बेटी से लिपटकर रोते उसके ताऊ नायब सूबेदार राजेश सिंह। जिसने भी यह दृश्य देखा, वह भावुक हो गया। राजेश सिंह ने कहा कि पिता नहीं चाहते थे कि सतपाल सेना में जाए, उसे टीचर बनाना चाहते थे, सतपाल ने कहा था कि वह सेना में जाएगा और एक दिन मुझसे आगे निकलकर दिखाएगा।

इससे पहले शहीद की पार्थिव देह गमगीन माहौल में दोपहर करीब 12.30 बजे घर लाई गई। भावुक लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़े। बच्चे, युवा, महिलाएं, बड़े-बुजुर्ग तिरंगा हाथ में लिए भारत की माता की जय... सतपाल अमर रहें... जैसे नारे लगा रहे थे। घर पर परिवार की महिलाएं-पुरुष और गांव के लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद के अंतिम दर्शन किए। अंतिम दर्शन के बाद वीरांगना विंतोष बेसुध हो गईं। बच्चों ने मकान की छत से पिता के अंतिम दर्शन किए।


पार्थिव देह पहुंचने पर सलामी देने के बाद पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। फिर दोपहर करीब 1.25 बजे बड़े भाई नायब सुबेदार राजेश कुमार, बेटे शांतनु, भतीजे नीरव को तिरंगा सौंपा गया। वीरांगना विंतोष गृहिणी हैं। 15 साल की

 पहले पार्थिव देह जम्मू कश्मीर से दिल्ली लाई गई। वहां सोमवार शाम गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद उसे बुहाना के लिए रवाना किया गया था। अब बुहाना से जैतपुरा तक शहीद के सम्मान में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। उधर, शहीद के घर पर मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद सतपाल के साथ 11 दिन तक रहने वाले बड़े भाई नायब सूबेदार राजेश का बुहाना थाने में पार्थिव देह के साथ ग्रामीणों को देखकर दर्द छलक पड़ा। ग्रामीणों और साथियों को देखकर वह गले लग कर रोने लगे। उन्होंने बताया कि 11 दिन तक वह भाई सतपाल के साथ थे। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, हर संभव प्रयास किए, लेकिन ग्रामीणों को देखकर अब उनकी हिम्मत टूट चुकी है।

 बुहाना थाना से सुबह 9 बजे शहीद की पार्थिव देह को तिरंगा यात्रा के साथ पैतृक गांव जैतपुरा के लिए रवाना कर किया। गांव से सैंकड़ों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। भारत माता की जय और शहीद सतपाल सिंह जिंदाबाद के जयकारों के साथ लोग तिरंगा यात्रा में चल रहे हैं। शहीद के घर शोक की लहर है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।

शहीद सतपाल सिंह की पार्थिव देह सोमवार शाम को जम्मू से दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर पहुंची। जहां पर 11 राजपूताना राइफल्स के ब्रिगेडियर, सेंटर कमांडेंट व मेजर जनरल, दिल्ली एरिया जीओसी ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद दिल्ली से रेवाड़ी, नारनौल, पचेरीकलां होते हुए पार्थिव देह रात करीब 12:30 बजे बुहाना थाना में एंबुलेंस के माध्यम से लाई गई। तिरंगा यात्रा और अपने जवान को अंतिम विदाई देने के लिए ग्रामीण पूरी तैयारियों में जुटे हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग गांव जैतपुरा पहुंच रहे हैं।

: शहीद हवलदार सतपाल सिंह का छोटा भाई एडवोकेट कुलदीप सिंह जब उनके बच्चों को लेकर जब बुहाना पुलिस थाने पहुंचा तो नायब सुबेदार राजेश कुमार बच्चों के साथ लिपट कर रोने लगे और अपने आंसू नहीं रोक पाए।

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